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Sunday, October 19, 2008

पुतिन की कुतिया से परेशान भारत का देहात (हास्य)


सदरू भगत चाहते हैं कि रमदेई के शरीर में भी वह GPS नेविगेशन यंत्र लगा दिया जाय जिसे कि रूसी पुतिन ने अपने कुतिया के गलेवाले पट्टे पर लगाया था, ताकि पता चल सके, उस कुतिया की तरह रमदेई कहाँ-कहाँ जाती है, किसकी किसकी चुगलखोरी करती है, क्या क्या करती है।

घर मे सदरू भगत आ तो गये लेकिन तय नहीं कर पा रहे थे कि चर्चा कहाँ से शुरू करें। तब तक रमदेई खुद ही ओसार मे आते हुए बोली -
आ गये नेताई छाँट कर, काम न धाम बस इसके यहाँ बैठो, उसके यहाँ बैठो....बस यही काम रह गया है इ बुढौती मे।

अरे तो क्या तेरे आस पास बैठ कर रखवाली करता रहूँ.....बडी आई पूछताछ करने वाली। अरे मैं भी जानता हूँ तू कहाँ-कहाँ जाती है। कभी हरखू के यहाँ जाएगी वहाँ उसकी पतोहू से बतकूचन करेगी, कभी मटरू के यहाँ जाएगी वहाँ चार-बात करेगी, औरतों का तो काम ही यही है......जहाँ चार जनी मिल गई तो बस न घर का ख्याल न बेटे पतोहू की चिंता......भैंस धोने-धाने  के बाद अभी भी धूप मे खडी है......ये नहीं कि उसे छाँव में लाकर बाँध दे......बस कभी उसके यहाँ तो कभी उसके यहाँ ।

रमदेई ने सदरू भगत का ये रूप देखा तो दंग रह गई, आज फिर कहीं से गाँजे का दम लगा लिया लगता है।

संभलकर बोलीं - क्या कहते हो, आज लगता है फिर से कहीं बैठकी हुई है।

बैठकी की बात करती है, ठहर तेरे सरीर मे भी GPS सिसटम न लगवा दिया तो कहना, तू कहाँ जाती है क्या करती है सब पता चलेगा।


क्या.....क्या......क्या लगा दोगे तो क्या होगा.....ई जीपीस फीपीस क्या बक रहे हो.......लगता है कुछ ज्यादा चढा ली है आज।

अरे जीपीएस एक मसीन है जो किसी के सरीर पर लगा दो तो पता चलता है कि वह कहाँ गया है, किधर है....सब पता चलता है। उ पुतिनवा है न, उसने अपने कुतिया मे वह जीपीएस लगाया है, वह कुतिया जहाँ जाती है पता चलते रहता है कि अब कहाँ जा रही है, क्या कर रही है।

तो मैं कुतिया हूँ.....ठहरो तुम्हारे जीपीएस को तुम्हारे ठौर मे न पहुँचा दिया तो कहना - कहते हुए रमदेई सामने पडे सिलबट्टे को उठाने को झुकी ही थी कि सदरू भगत चले भाग। एक बार जो भागना शुरू किया तो फिर पीछे मुडकर नहीं देखा। आगे आगे सदरू भगत, पीछे पीछे रमदेई।

तभी रास्ते मे लल्ली चौधरी मिल गये - भागते हुए सदरू से पूछा - अरे क्या हो गया कहाँ भागे जा रहे हो ?

सदरू ने भागते-भागते ही कहा -  भाग चलो नहीं तो आज खैर नहीं।

क्यों क्या हुआ ?

GPS प्रणाली   फेल हो चुकी है और वह परीक्षण स्थल से छूटकर सीधे यहीं आ रही है :)

 


- सतीश पंचम

7 comments:

Gyandutt Pandey said...

वाह, जीपीएस यहां फेल है। सदरू का जीवन रामदेइ से संकटग्रस्त। उधर ताऊ की ताई के संदर्भ में भी फेल ही रहता है। वहां सिलबट्टे की बजाय लठ्ठ चलता है।
जीपीएस लगता है पौराणिक युग का अस्त्र है!:)

ताऊ रामपुरिया said...

तो मैं कुतिया हूँ.....ठहरो तुम्हारे जीपीएस को तुम्हारे ठौर मे न पहुँचा दिया तो कहना - कहते हुए रमदेई सामने पडे सिलबट्टे को उठाने को झुकी ही थी कि सदरू भगत चले भाग। एक बार जो भागना शुरू किया तो फिर पीछे मुडकर नहीं देखा। आगे आगे सदरू भगत, पीछे पीछे रमदेई।
भाई पंचम जी आज आपने सीधा ही सिक्सर ठोक दिया आते ही ! मजा आगया ! कभी आपके इस सदरू भगत से ताऊ की भी मुलाक़ात करवावो ना !:)

राज भाटिय़ा said...

सतीश जी बहुत ही सुन्द कहानी लिखी है आप ने ओर इस GPS की भी कहानी खुब अच्छी लगी, कही यह राम्देई हमारी ताई तो नही है, इसी लिये ताऊ भी सद्रु भगत से मिलना चाहता है...
वेसे आप का यह रमदेई ओर सदरु भगत का लेख हमेशा ही मन को छु जाता है.
धन्यवाद

सतीश पंचम said...

राजजी, मुझे आपके और ताउ के टिप्पणीयों से एक अलग ही ख्याल आने लगा है......जरा सोचिये कि सदरू भगत ताउ हैं, रमदेई ताई और लल्ली चौधरी आप खुद यानि राजजी....तो सोचिये कैसे-कैसे फंतांसी क्रिएट हो सकते हैं :)
कभी आप लोगों का मिलन जल्द ही सदरू भगत से कराउंगा:)

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

सतीश जी, लगता है आप मेरे गाँव के आसपास की ही कोई कथा सुना गये। ...वही यू.पी.बिहार की गोबरपट्टी के देहात की...।

हा.हा.हा.हा....। मजेदार रहा ये भी।

Paliakara said...

मजेदार पोस्ट है, आभार. मैं शायद वंचित ही हो जाता.

मनुज मेहता said...

haha haha
wah kya baat hai GPS ko kahan la kar joda, wah maza aa gaya janab. upar wala aapki kalam ko lambi umr de

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