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Saturday, September 27, 2008

खेत में भैंस पडी और खदेरन चले मानहानि का मुकदमा करने अपने ही भाई पर वह भी अंबानी भाईयों की देखादेखी (फुरहरी)


खदेरन ने जब से सुना है कि अंबानी भाईयों के बीच दस हजार करोड की मानहानि का केस चल रहा है बेचैन हो गये और अपने भाई सुखरन पर मानहानि का मुकदमा दायर करने की ठानी। मुकदमे से पहले राय-बात के लिये सदरू भगत के यहाँ गये, देखा तो सदरू हुक्के को अपनी खटिया के पाये से टिका कर रख दिये और दोनों पैर खटिया पर उपर करके बैठे हैं।
मुदा अब क्यों मुकदिमा करोगे.....बाँट बखरा तो तुम दोनो भाइयों मे हो ही गया है फिर...- सदरू ने सरपंची अंदाज में कहा।

खदेरन बोले - अरे बाँट-बखरा हो गया तो क्या किसी की मुडी काट लेंगे.......मैं तो मुकदिमा करूँगा.....कि ये हमारे खेत में अपनी भैंस जान कर छोडे हैं, मेरी छीछालेदर करना चाहते है, मैं तो नालिश तक करवाने की सोच रहा हूँ ।

सदरू बोले - अरे पड गई होगी अपने आप ही.....भैंस को क्या पता कि ये तुम्हारा खेत है.....वो तुम्हारा......उस भैंस को तो अब भी यही लग रहा होगा कि दोनों खेतों के मालिक एक ही हैं......वो अपने पुरानी जगह ही चर रही थी........ तो चलो मान मलौवल कर लो......काहे एतना जान दे रहे हैं कि मुकदिमा करोगे.....कोरट कचहरी करोगे। खदेरन फिर भी हाँ छोड न कहने को तैयार ही नही...जिद फान ली कि मुकदिमा करूँगा तो करूँगा.....तब सदरू भगत अपने असली रंग में आए....बोले - तुम्हारी बुध्दि घास चरती है क्या......।

माने ?

माने गदहा का वो ......ससुर आये हो मुकदिमा और जाजिम बिछाने......अरे तुम्हारी बुध्दि कितनी चलती है ये तो मैं तब ही जान गया था जब तुम दोनो भाईयों में अलगौजी हुई थी.....। अलगौजी के अगले ही दिन तुम अपने नये घर मे रामायण पाठ करवाये थे कि भाई से पिंड छूटा अब तुम नया जीवन सुरू करोगे.....नया परिवार खडा करोगे.......लेकिन बच्चा भूल गये कि रामायन में भाई-भाई का प्यार बताया गया है....मोह-बिछोह बताया गया है कि एक भाई को अपने भाई के साथ कैसे रहना चाहिये और तुम करवा रहे थे रामायण पाठ......आँख के अंधे और नाम कजरौटा सिंह.....।

खदेरन अब भी चुप बैठे सुन रहे थे....उम्मीद नहीं थी कि सदरू इतना भडक जाएंगे।

सदरू ने आगे कहना जारी रखा - अरे तुम जिनको देख सुनकर मुकदिमा करने का मन बनाये हो वह भी तुम्हारी तरह ही है......उस दिन नंदलाल साह के दुकान पर टीवी देख रहा था तो देखा ये धन्ना सेठ दोनों भाई आपस मे अलगौजी करते समय काफी विवाद किये.....सबसे कहे कि हमारा बाँट-बखरा कर दो....हम दोनो भाई साथ नही रहना चाहते तो जानते हो उस समय बगल में कौन खडा होकर ये सब देखताक रहा था ......एक रामकथा बाँचने वाले प्रसिध्द बापू जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्हे ईनके परिवार बहुत मानते है, कोई विवाद हो तो उनसे राय लेते है, .....लेकिन ये बापू यह नहीं कह सके कि मैं तो रामकथा बाँचता हूँ....मैं क्यो भाईयों के अलग होने मे मदद करूँ जबकि रामायण मे भाईयों को एक होते बताया गया है......तब सारी रामायणी धरी रह गई थी........तुम आये हो उन धन्ना सेठो का नकल करने।

ईधर सदरू भगत की पत्नी रमदेई अलग भुनभुना रही थी.......आ गये हैं.......अब चलो इनको चाह - पानी पियाओ..........खुद अपने यहाँ झगडा करेंगे और हमारे यहाँ आकर लहरा लगा देंगे चाह दो......तमाखू दो........हे पानी दो.........।

तभी किसी ने कहा - अरे खदेरन तुम्हारी बकरी तुम्हारे भाई के खेत में पड गई है, जल्दी जाओ न अभी बवाल हो जायगा।

सुनते ही खदेरन उठ कर चल दिये कि जल्दी से बकरी को हटा लूँ न अभी मुझपर ही न मानहानि का दावा हो जाय। इधर रमदेई का भुनभुनाना जारी था.......अरे कैसे तो कहा गया है कि कैसे तो मान और कैसे तो न मान। तभी रमदेई की लडकी रतना ने चुपके से भौजी की उंगली टीपते कहा - अम्मा को बोलना भी नहीं आता, कहती है कैसे तो मान और कैसे तो न मान........ यह नहीं कि कहें - मान न मान मैं तेरा मेहमान।

रतना के कहे शब्द शायद खदेरन ने सुन लिये थे.......खदेरन के मुह से बरबस निकला ........ यहाँ भी मानहानि ।

- सतीश पंचम

9 comments:

योगेन्द्र मौदगिल said...

ha..ha..ha..
achha vishya uthaya.....

मित्रwar
हरियाणवी टोटके किस्से और कविताएं
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समय निकाल कर is par bhi आईयेगा
सुस्वागतम्

ताऊ रामपुरिया said...

अरे खदेरन तुम्हारी बकरी तुम्हारे भाई के खेत में पड गई है, जल्दी जाओ न अभी बवाल हो जायगा।

हमेशा की तरह जबरदस्त रचना ! हँसी रोकना भी मुश्किल है !

भूतनाथ said...

behaterin likhaa ! dhanyavaad!

राज भाटिय़ा said...

पंचम जी काम की बात आप ने मजाक मजाक मे कह दी, मुझे तो लगता हे यह राम कथा वाचंने वाला ही कोई नयी कथा वचबा रहा हे इन भाईयो से, हम राम को तो मानेगे, लेकिन उस का कहना नही मानेगे,क्योकि दिखाबा तो आसान हे ...
धन्यवाद अब मे अपनी भेंस ताऊ के खेत से ले आऊ, कहीं कोई बवाल हो जायगा।

सतीश पंचम said...

भाटिया जी ताउ के खेत में भैंस पडी भी हो तो कोई बात नही....बवाल न होने पायेगा क्योंकि वो किसी दर्जी की मातमपुर्सी में गये थे वहीं उलझ गये हैं मैं अभी वही से आ रहा हूँ :)
और मान लो ताउ भडक भी जाएं तो कोई बात नहीं बस अपना लट्ठ जरा साथ रखना वो जर्मन वाला....क्या है कि ताउ जरा लट्ठ देखकर EMOTIONAL हो जाते हैं और मामला ठंडा पड जाता है :)

Gyandutt Pandey said...

वाह, खदेरन का कैसा मान और कैसी उसकी हानि!
रस्सी है नहीं; उसका बल भर ही है!

जितेन्द़ भगत said...

पढ़कर मजा आ गया। बहुत खूब।

panchayatnama said...

आँख के अंधे और नाम कजरौटा सिंह.....।

......तब सारी रामायणी धरी रह गई थी........तुम आये हो उन धन्ना सेठो का नकल करने।

बेहतरीन रचना. भरपूर कटाक्ष है

shyam kori 'uday' said...

लेख प्रभावशाली है।

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

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