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Wednesday, September 24, 2008

तुम इतना जो टिप्पणीया रहे हो, क्या कोई पोस्ट लिखा है जिसे सबको बता रहे हो। (हँसी-पडक्का)


तुम इतना जो टिप्पणीया रहे हो,

क्या कोई पोस्ट लिखा जो सबको बता रहे हो।

लंगडी-लूली पोस्ट लिखी बेकार ,
पर मुझे खूब जमा बता रहे हो,

बन जाएंगे लिक्खाड लिखते-लिखते,
ऐसा वहम क्यूं पाले जा रहे हो,

जिन मुद्दों को सबने छोड दिया,
तुम क्यूं उनको छेडे जा रहे हो,

क्या कोई पोस्ट लिखा जो बता रहे हो।

पोस्ट मे लिखते हो खाया मुर्ग-मुसल्लम,
देखा तो दाल भात खा रहे हो

ब्लॉग जगत मे दहाडते हो शेर की तरह,
घर में देखा तुम लात खा रहे हो

टिप्पणीयों का खेल है ब्लॉगिंग,
टिप्पणीयों में ही मात खा रहे हो,

क्या कोई पोस्ट लिखा जो बता रहे हो।
:)
- सतीश पंचम

( कैफी आजमी की नज्म से साभार पैरोडीयाना )

21 comments:

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

ख़ुद इतना चल चुके अब हमें क्या चला रहे हो?
आह आह! अरे नहीं-नहीं वाह वाह!

योगेन्द्र मौदगिल said...

Pancham g,
sambhalo tippani....

सौरभ कुदेशिया said...

wah wah.. wah wah..

Original se jyaada to duplicate main maja aaya :-)

Anil Pusadkar said...

टिप्पणीयो का खेल है ब्लोगिन्ग, इसीलिये टिपाणी किये जा रहे है धान्सू आइडिया

Arvind Mishra said...

वाह भाई वाह छा गए यार !

जितेन्द़ भगत said...

हसीं मजाक में भी आप की बातों में एक सच्‍चाई है-
बन जाएंगे लिक्खाड लिखते-लिखते,
ऐसा वहम क्यूं पाले जा रहे हो,

जिन मुद्दों को सबने छोड दिया,
तुम क्यूं उनको छेडे जा रहे हो,

vineeta said...

बन जाएंगे लिक्खाड लिखते-लिखते,
ऐसा वहम क्यूं पाले जा रहे हो,

बहुत अच्छा मज़ा आ गया. ऐसे ही लिखते रहे पक्के लिखाड़ बन जायेंगे...

Ghost Buster said...

कॉफी आजमी की ये नज्म तो बड़ी जम रही है. पौड्कास्ट पर ले आते तो और भी रंग जमता.

डॉ .अनुराग said...

२४ घंटे की है उम्र जिसकी
उस पोस्ट पे इतरा रहे हो ......

Gyandutt Pandey said...

सही सूंघा! फलाने जी की मेरे ब्लॉग पर होली-दिवाली टिप्पणी आती है, और मैं समझ जाता हूं कि आज उन्होंने कोई पोस्ट ठेली है!
और अभी तक तो मेरा कयास गलत नहीं हुआ! :-)

अनूप शुक्ल said...

दर्द बड़ा गहरा है, जिसे समझे नदी वो सहरा है।

गुस्ताखी माफ said...

मजेदार है

ताऊ रामपुरिया said...

ब्लॉग जगत मे दहाडते हो शेर की तरह,
घर में देखा तुम लात खा रहे हो

बहुत सुंदर परोडीयाये हैं आप ! बधाई ! आपके
उपरोक्त शेर ने सारी पोल खोल दी है ! धन्यवाद !

अशोक पाण्डेय said...

बहुत खूब। आपने तो रंग जमा दिया है :)

शोभा said...

बन जाएंगे लिक्खाड लिखते-लिखते,
ऐसा वहम क्यूं पाले जा रहे हो,

जिन मुद्दों को सबने छोड दिया,
तुम क्यूं उनको छेडे जा रहे हो,

क्या कोई पोस्ट लिखा जो बता रहे हो।
बढ़िया लिखा है।

Udan Tashtari said...

बेहतरीन..सटीक..वाह!आह्ह्!! हा हा!!
वाह वाह!!
बहुत खूब!!

सतीश पंचम said...

अरे भाई आप लोगों ने तो मुझे चौंका ही दिया....सुबह ऑफिस जाने से पहले पोस्ट लिखने के बाद अब जाकर रात नौ बजे पोस्ट देख रहा हूँ तो भरी हुई है टिप्पणीयों से.......अच्छा लगा। लेकिन शायद आप लोग कुछ मन ही मन बुरा भी माने होंगे कि ये क्या छीछालेदर कर रहे हैं हम लोगों की ..... टिप्पणी करो तो मुसीबत न करो तो मुसीबत....लेकिन मैं यहाँ आप लोगों से माफी चाहता हूँ ...जहाँ तक मैं महसूस कर रहा हूँ कि वक्त की कमी आज सब के पास है ऐसे में कोई यदा-कदा अपनी पोस्ट लिखने के बाद अपना कुछ समय निकाल कर यहाँ वहाँ कुछ प्रचारार्थ टिप्पणी कर दे तो उसे हेठी न समझें बल्कि सराहना ही करें कि कम से कम कुछ तो इस ब्लॉगिया हवन कुंड मे अपनी ओर से योगदान कर रहे है....इससे जाने-अनजाने हिंदी या कहें ब्लॉगजगत का उठान ही हो रहा है.....। यह पोस्ट मैने हँसी-मजाक के तौर पर ही लिखा है और हँसी-मजाक के तौर पर ही लें ।

राज भाटिय़ा said...

सतीश पंचम जी अगर इस पैरोडी को कैफी आजमी जी पढ ले तो बहुत खुश हो जाये, मजा आगया आप की नज्म पढ कर.
धन्यवाद

Nitish Raj said...

सतीश जी आपकी पोस्ट पढ़ने के बाद मैंने रुख किया टिप्पणियों का तो उसमें आप की टिप्पणी भी मिली पढ़ कर सच मानिए तो अच्छा लगा वरना पहले मैं ये ही सोच रहा था कि कई बार कई लोग इस बात को क्यों उठाते हैं। जबकि जानते हैं कि ये लेन-देन की दुनिया है। यदि कोई करता है तो बोला जाता है नहीं करता तो और बोला जाता है। पुलिस जैसी हालत होगई है ब्लागर पर टिप्पणी करने वालों की। इसलिए मैंने आज लिखने को वीराम देकर सिर्फ लिखने में लग हूं तो टिप्पणियां। सारी शाम ऑफिस में काम किया और अब तक बैठकर टिपियाये जा रहा हूं क्योंकि मेरा भी तो फर्ज बनता है ब्लागर भाइयों के प्रति।

Nitish Raj said...

वैसे तुकबंदी पसंद आई।

pallavi trivedi said...

badhiya laga...

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