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Monday 1 September 2008

एन डी टी वी और अजीब उलझन




जेल में कई चीजों की कमी महसूस होती है, बच्चों और स्त्रियों की आवाज वहां सुनाई नहीं देती, जो भाषा बोली जाती है उसमें गाली और गंदगी होती है। अभी मुझे महसूस हुआ है कि मैंने पिछले कई महीनों से कुत्ते का भौंकना नहीं सुना है।

- जवाहरलाल नेहरू की जेल डायरी

कभी-कभी कैमरा रिपोर्टिंग करने के साथ कुछ अनचाही चीजें भी दीखा जाता है, अभी रविवार की शाम NDTV 24x7 पर Walk the Talk प्रोग्राम देख रहा था, ममता बनर्जी से गांव-कस्बे की किसी सडक पर चलते-चलते शेखर गुप्ता सवाल पूछ रहे थे, कभी-कभी रूक भी जाते थे। उन दोनों की बातचीत के दौरान उस इलाके के काफी लोग थोडी दूर खडे होकर ये सारी सवाल-जवाब भरी कवायद देख रहे थे, उनके हाव भाव से लग रहा था जैसे उन्हें कहा गया हो कि जरा दूर ही खडे हों, पास न आयें ताकि कैमरे में अनचाही आवाजें और डिस्टर्बेंस आदि न हो( जो कि ठीक भी था)। अब हालत ये थी कि वहां सडक पर चलते हुए बात करते शेखर गुप्ता और ममता बनर्जी के अलावा कोई और किसी की हरकत नजर नहीं आ रही थी, लोग खडे तो थे लेकिन शांत। एक दुपहिया वाहन वाला उस कस्बेनुमा सडक से गुजरा भी तो पैदल होकर अपने वाहन को लगभग खींचते हुए लेकर गया ताकि गाडी की कोई आवाज न हो। अभी ये सब चल ही रहा था कि कहीं से एक कुत्ता आ गया, पहले वह थोडी दूरी पर रूक गया, फिर बेखौफ होकर ममता बनर्जी के पास पहुंच गया और लगा उनके पैरों के पास मंडराने। अब हालत ये थी कि ममता बनर्जी का आधा ध्यान अपने टाटा विरोध पर बोलने पर था और आधा ध्यान कुत्ते की तरफ, कैमरे ने अपना ऐंगल भी बदला की कुत्ता न दीखे लेकिन वो माने तब न.....थोडी देर मंडराने के बाद वो कुत्ता वहां से थोडी दूर जाकर बैठ गया लेकिन अब भी कैमरे में बराबर दिख रहा था।


अब इस पोस्ट के दूसरे हिस्से पर आते हैं - ममता उस कुत्ते के दूर चले जाने के बाद अब अपने पूरे उफान पर थीं....टाटा ये......टाटा वो....टाटा फलाना.....टाटा ढेकाना......न जाने कितनी बार टाटा कह चुकीं कि तभी ब्रेक होने की घोषणा हुई, क्या देखता हूं कहा जा रहा है -


"Walk the Talk , Brought to you by TATA Indicom - सुनें दिल की बात"
:)
- सतीश पंचम

7 Comments:

विवेक सिँह said...

अच्छा है. बेहतरीन है . बधाई.

ताऊ रामपुरिया said...

"Walk the Talk , Brought to you by TATA Indicom - सुनें दिल की बात"
जबरदस्त खोजी निगाह आपकी ! इंसानों को तो आप रोक लोगे पशु आपके
वश में थोड़ी ही हो सकता है ? और ब्रेक का जूमला तो आपने गजब पकडा !
बहुत धन्यवाद !

Anil Pusadkar said...

gazab kar diya satiya bhaiya,samachaaron ki sponcership ki pol khol kar rakh di

अनुराग said...

ममता वैसे भी बड़ी "लाउड राजनेतायो" में आती है(उमा भारती)भी उसी श्रेणी में है....हर समय हाथ में तलवार...... ,

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

Excellent observation. बहुत खूब! यानी के ममता का विरोध भी मुखर हो सका तो टाटा के कृपा से!

Gyandutt Pandey said...

अच्छा, ममतादी नें छूटते ही यह नहीं कहा कि यह कुक्कुर टाटा का भेजा है! :)

राज भाटिय़ा said...

सतीश जी , उस कुत्ते का गुस्सा बेचारे टाटा पर निकाल दिया, मजा तब आता जब कुत्ता भोकता ओर ममता जी कॊ थोडा भगाता
धन्यवाद, इस सुन्दर पोस्ट के लिये

बातें, जो जाने की जल्दी मचा रही हैं.....

कुछ बातें जल्दी मचाती हैं कि मैं जा रही हूँ......मैं न रूकूंगी। समय भी उन्हें ऐसा करने के लिये उकसाता रहता है कि कह दो कि देर हो रही है.......बहुत रूक लिये......हम जा रही हैं........अब न रूकेंगी.............ऐसी ही बातों को देखने पढने के लिये इस राह से गुजर सकते हैं जहां समय को एकबारगी धकियाया जा सकता है कि समय तुम बीत गये तो क्या हुआ ? ठहरने की सांकल तो अब भी खटखटायी जा सकती है......

ऐसी ही बीते-अनबीते पलों को इन लिंक्स के जरिये देखा जा सकता है ।

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