सफेद घर में आपका स्वागत है।

Sunday, August 17, 2008

ऐक फूल, मल्टीपल माली (फुलकारी)


अब तक आप ने एक फूल दो माली के बारे में सुना होगा, लेकिन झारखंड में एक फूल और मल्टीपल माली नजर आ रहे हैं। निर्दलीय विधायक मधु कोडा न जाने कौन मधुवन में खिले कि सभी लोगों से बाजी मारते निर्दल मुख्यमंत्री होने का इतिहास रच दिया, और उन्हें समर्थन देने वालों के बारे में क्या कहा जाय, लालू जी की पार्टी, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा पार्टी , निर्दलीय विधायक आदि सभी लोगों की ओर से उन्हें समर्थन मिला और सफलता से काफी समय तक कोडा जी इस मधुवन में खिले रहे, और उन्हें ईसी तरह कई माली सींचते रहे।
यहां एक माली शिबू के मन में यह इच्छा हुई कि मैं ही क्यों न खिल जाउँ, बस फिर क्या था, अन्य मालीगण से अपनी व्यथा बताई और लगे हाथ अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी, लेकिन यहीं पेंच लड गया, लालू जी ने कहा- शिबू जी को खिलना है तो खिलें, हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि उनमें स्वंय के खिलने लायक खाद पानी हो तो, वरना हम अपने से कोई खाद पानी नहीं देंगे। यही बात शिबू जी को बुरा लग गई, कहा - केन्द्र में तो हमसे ही न खाद लिया था, अब पानी के लिये हमसे कह रहे हो, ईतने भी बेपानी न करो यार। अरे सुना है बारह बरीस में तो घूरे के भी दिन बहूरते है, तो क्या हम उनसे गये गुजरे हैं, हम अपने घूरे से ही खाद देंगे, पानी देने और भाई लोग आ जाएंगे।
अब और लोग पानी देने आते हैं कि नहीं, लेकिन एक बात तय है - जब तक मालीगण अपने में उलझे रहेंगे, मधु जी मधुवन में खिले रहेंगे, और कहेंगे -

मधुबन खुशबू देता है, सागर सावन देता है,
जीना उसका जीना है, जो औरों को उलझा देता है
मधुबन खुशबू देता है .......
:)
- सतीश पंचम

4 comments:

Anil Pusadkar said...

samayik aur sateek.

राज भाटिय़ा said...

आप के इस सफ़ेद घर मे आए बिना गुजारा नही होता,इस लेख मे तो आप ने अच्छे अच्छे मालियो का नाम रोशन कर दिया,लेकिन अगर मेरे पास मधुवन हो तो मे ऎसे मालियो को अपने से दुर ही रखु, ओर बाहर लिख कर लगा दु, कुत्तो को लाना मना नही, लेकिन इन गिने चुने मालियो को अन्दर आना बर्जित हे, ओर देखते ही .....
धन्यवाद आज की सच्ची ओर सुन्दर पोस्ट के लिये

Nitish Raj said...

मित्रवर सही कटाक्ष अबके कोड़ा और गुरुजी के हालात पर साथ ही लालू पर भी सटीक वार। बहुत ही अच्छी पोस्ट। सफल

P. C. Rampuria said...

"केन्द्र में तो हमसे ही न खाद लिया था,
अब पानी के लिये हमसे कह रहे हो,
ईतने भी बेपानी न करो यार।"


बहुत धारदार कटाक्ष है ! बधाई !

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'
A Photo from - Thoughts of a Lens

ढूँढ ढाँढ (Search)

© इस ब्लॉग की सभी पोस्टें, कुछ छायाचित्र सतीश पंचम की सम्पत्ति है और बिना पूर्व स्वीकृति के उसका पुन: प्रयोग या कॉपी करना वर्जित है। फिर भी; उपयुक्त ब्लॉग/ब्लॉग पोस्ट को हापइर लिंक/लिंक देते हुये छोटे संदर्भ किये जा सकते हैं।




© All posts, some of the pictures, appearing on this blog is property of Satish Pancham and must not be reproduced or copied without his prior approval. Small references may however be made giving appropriate hyperlinks/links to the blog/blog post.