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Saturday, June 28, 2008

गाड़ी का दरवाजा खोलने के लिए अगवारु - पछ्वारू (हास्य)

कल समाचार मे देखा की एक नेता जो किसी कमिटी वगैरह का कुछ लगता वगता था , किस तरह मोबाईल का इस्तेमाल अपने रुतबे को बनाये रखने के लिए कर रहा था , हुआ यूँ की मीडिया वाले जब प्रश्न पूछ चुके तो वह नेतानुमा - नेता जवाब देने के बाद अपनी गाड़ी के तरफ़ मुडा ताकि बैठ जाएँ गाड़ी मे , लेकिन यह क्या गाड़ी का दरवाजा खोलने के लिए कोई झट से सामने नही आया था , नेता लगा अपना मोबाईल देखने , लग रहा था जैसे कोई जरूरी काम कर रहा है , यह संकेत था उस अगवार - पछ्वार करने वाले चमचे के लिए की गाड़ी का दरवाजा खोल ....... । बस इतना समय काफ़ी था उस अगवारु - पछ्वारू के लिए और वो झट से जा पहुँचा गाड़ी के पास और चट से दरवाजा खोल दिया । नेता उस गाड़ी मे ऐसे समाया की जैसे उसमे समाने के लिए ही बना था ।

खैर वो नेता तो चला गया अपना उड़नदस्ता लेकर और हम टापतेरह गए की जिस आदमी को गाड़ी का दरवाजा खोलने की भी इच्छा नही होती, वो जनता के लिए अपने दिल कैसे खोलेगा, जब की जनता के ही कारण उसे ये गाड़ी और रूतबा मिला है । मन मे तो आया कुछ कह दूँ , लेकिन क्या करें, कह नही पाये , टीवी पर जो थे , ऐसी रुतबई पर आप कुछ कहना चाहें तो जरूर कह सकते हैं, हमारी ब्लोग्लाईन हमेशा खुली है :)

4 comments:

Gyandutt Pandey said...

अगवारू-पिछवारू = चेला-चापड़!
शब्द मस्त लगा। इसका प्रयोग अब हम निर्द्वन्द करेंगे! :)

डा० अमर कुमार said...

व्यक्तिपूजा...जी व्यक्तिपूजा !
यही व्यक्तिपूजा तो हमको मारे डाल रही है ।

Udan Tashtari said...

इन्होंने भी पहले ऐसे ही किसी का दरवाजा खोला/बंद किया होगा तो आज नसीब जागे..कि कोई इनके लिए दरवाजा खोल/बंद कर रहा है. यही क्वालिफिकेशन है इस क्षेत्र की. :)

अनूप शुक्ल said...

पहले तो लगा टापतेरह कौनौ नया शब्द है। फ़िर पता लगा कि टाप से तेरह सट गया और टापतेरह बना गया। ई होते हैं वर्तनी के मजे! है न!

नेता बेचारा अब दरवज्जा भी खोलेगा? कल को कहियेगा ब्लॉगर टेस्ट कमेंट लिखने के साथ सच्ची में टिपियायेगा भी। :)

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