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Tuesday, July 1, 2008

देश Autopilot पर है. (Short Story)

नितिन के कदम खुदबखुद Pilot Rest-Room की ओर बढे जा रहे थे, कमबख्त इस बंगलोर वाली Flight ने परेशान कर रखा है , एक नजर घड़ी की तरफ़ डाली - ओह.... Its 4.00 am.....damm, I hate this timing. जब सभी लोग सो रहे होते हैं रात एक बजे , कमबख्त तभी इस Flight को attend करो , साले ये भी तो नही कह सकते की एक spare Pilot रखें, cost saving .......Bullshit.... मन ही मन नितिन कुढ़ता हुआ Pilot Rest Room मे दाखिल हुआ। सोफे पर धम्म से गिरते हुए जैसे उसे लगा अब यहीं सो जाऊं तो अच्छा रहे, तभी Rest Room attendent कृपाल सिंघ ने दरवाजा खटखटाया , May I sir, ............ya Come come, न चाहते हुए भी नितिन को बोलना ही पड़ा , इस वक्त वो किसी से बोलना नहीं चाहता था लेकिन एक कृपाल ही तो था जो रोज उसी की तरह नाईट ड्यूटी करता , और गाहे बगाहे जब उसे नाईट ड्यूटी से खीज होने लगती तो कृपाल को देख कर जैसे उसे अहसास होता की वो अकेला नहीं है, हालांकि Co-Pilot सुधीर साथ होता है लेकिन उसके साथ कितनी देर बात की जाय, बंगलोर से मुंबई तक तो लगभग रोज ही वो दोनों साथ साथ होते हैं और बातें भी तो वही पायलटों वाली , Poor Visibility, Hang-on, Hang-Off, one point Landing , Two Point Landing, कमबख्त इसके सिवा ज्यादा हँसी मजाक भी तो नहीं कर पाते , अभी उस दिन Air-Hostess मीना चटर्जी को सिर्फ़ Hi Kitty ही तो कहा था , Flying Manager मिश्रा ने छूटते ही कह दिया , see , I don't want any escalations, Please behave properly in Cockpit, Your voice details are with us........no more to say. साला जैसे उसे cockpit की इन्ही बातों को सुनने के लिए रखा है।

सुधीर साब नहीं आए - कृपाल ने पानी का ग्लास और नमकीन रखते हुए पूछा।

नहीं, उसके कोई गेस्ट मिल गए हैं , उनसे मिल कर बाद मे आएगा- अनमने होकर नितिन ने जवाब दिया ।

चाय ले आऊं ?

नहीं , आज मूड नहीं है । तुम जाओ , अभी थोड़ा सोना चाहता हूँ ।

जी अच्छा, - कहकर कृपाल वापस चला गया।

पानी पीकर नितिन की नजर टेबल पर पड़ी aviation Magazines पर पड़ी, - कहीं Airspace है, तो कहीं Flying ढकी है, उसके बगल मे ही Wings दिख रही है , उसने ज्यादा इधर उधर न देखते हुए सोफे पर ही सो जाने का उपक्रम किया , पैर फैलाकर उसने आँखें बंद कर लीं , लेकिन कमबख्त नींद को क्या हो गया , वो भी नहीं आ रही अब, सामने पड़े Rest Bed पर नजर पड़ी , नितिन ने उठकर उसी पर सो जाना चाहा, पानी और नमकीन वैसे ही पड़े रहे, जैसे उन्हें पता हो की उन्हें कोई छूने वाला नहीं है- इतना वो भी जानते हैं।

Bed पर पड़ने के बाद नितिन ने आँखें बंद कर सोना चाहा , लेकिन बहूत देर तक आँखें बंद करने के बाद भी नींद नहीं आई, कभी - कभी ऐसा भी होता है की जिस चीज की जब जरूरत होती है, वो अचानक मिल जाए तो उस चीज की वल्यु ख़त्म सी हो जाती है। वह चीज जब तक सामने नहीं होती , लगता है , यही सबसे जरूरी चीज है।

अब........

अब क्या करूँ, ये अचानक नींद को क्या हो गया, अभी तक तो साली जैसे बदन तोड़ रही थी- नितिन जैसे मन ही मन बुदबुदाया। Bed के बगल मे पड़े न्यूज़ पेपर पर हाथ बढाया ..... सोये सोये ही खबरें अनमने सी देखने लगा , Nuclear deal issue गर्म था , एक जगह आरुशी हेमराज की खबरें बतायी गयी थीं, मुह का स्वाद जैसे कड़वा हो गया, एक मर्डर क्या हुआ पूरा मिडिया पीछे पड़ गया, तभी एक जगह नजर पड़ी- विमान मे पायलट सो गए , पूरी ख़बर मे दिलचस्पी बढ़ गयी, एक तो वैसे भी उसके पेशे से जुड़ी ख़बर थी, ऊपर से ये जिस तरह से हेडिंग लिखी गयी थी , उससे उसकी दिलचस्पी और बढ़ गयी, पूरी ख़बर को एक साँस मे पढ़ डाला, विमान Autopilot पर रख कर पायलटों के सो जाने की ख़बर थी की किस तरह विमान मे कई सौ यात्री थे और पायलट थे की सोये हुए थे, एक बार फ़िर नितिन को लगा मुह का स्वाद बिगड़ गया है, उठ कर बैठ गया, कुछ देर यूँ ही bed पर बैठने के बाद , उसने सोचा चाय पी जाय, बगल मे लगे काल बेल को बजाया, थोडी देर मे कृपाल वापस दरवाजे पर-

yes Sir?

कृपाल एक चाय लाना।

जी- कहकर कृपाल चला गया।

नितिन फ़िर सोच मे डूब गया, - क्या होता अगर Autopilot Mode मे ही कोई accident वगैरह हो जाता। ऐसा नहीं है की नितिन ने प्लेन Autopilot मे न रखा हो, लेकिन कितनी देर, सिर्फ़ कुछ मिनट तक जब लगता की यहाँ ज्यादा कुछ Handle करने को नहीं है, और फ़िर CoPilot भी तो होता है, लेकिन यहाँ तो दोनों ही सो गए थे । सोचते हुए नितिन को News की headlines याद आई - गुर्जर आन्दोलन से rail सेवा बंद, सिखों ने बाबा राम रहीम के वजह से बंद किया, jammu बंद , अमरनाथ श्राइन बोर्ड से जमीन वापस ली गयी, मुंबई मे बाहरी- भीतरी के नाम पर हंगामा मचा है , लोगों को परेशान किया जा रहा है की तुम नॉर्थ वाले हो या कहाँ के ...............

तभी नितिन ने सोचा - ये देश भी तो Autopilot पर है - कोई देखने वाला नहीं, कोई बोलने वाला नहीं - ऐसे मे कोई Accident हो जाए तो .......लेकिन accident तो उस विमान मे भी नहीं हुआ था , तो क्या देश सचमुच Autopilot पर है ?

* * * * *

दोस्तों अपनी राय जरूर दें, आपकी टिप्पणियों का इंतजार है..........

12 comments:

Gyandutt Pandey said...

सचमुच देश आटो पाइलट पर है। पिछले महीने गुर्जर आन्दोलन में गाडियां बन्द रहीं, पर आज पिछले महीने के बारे में विवरण लिखते समय कई प्लस पॉइण्ट हैं जो लिखे जा सकते हैं।
आटो पाइलट अपने आप में इत्ता खराब भी नहीं। :D

Udan Tashtari said...

देश तो बेहतर स्थिति में ही है ऑटो पायलट पर--ऑटो पायलट मोड में तो एक्सिडेन्ट शायद हो जाये मगर ऐसे ऐसे पायलट हैं कि उनके चलाये तो एक्सिडेन्ट सुनिश्चित है..

Tarun said...

Satish, bahut khoob, Desh auto pilot pe hi hai, aur ye saari janta hai pilot jo kisi ke bhi kehne bhi automatic dange, jalanae phukne per utaru ho jati hai.

DR.ANURAG said...

एक ख़बर से प्रेरित होकर आपने इस कहानी से ढेरो वाजिब ओर एक अनसुलझा सवाल छोड़ दिया है.......वाकई ऑटो मूड में चल रहा है कई सालो से .....

डा० अमर कुमार said...

यह आटोपायलट कहीं अपने रामभरोसे थ्योरी को मज़बूत तो नहीं कर रही ? नहीं, नहीं..मैं तो वैसे ही एक बात कह रहा था !

Lovely kumari said...

achchha likha hai aapne.aaj pahli baar idhar ka rukh kiya hai.jari rakhen.

swati said...

anuraag ji se sehmat hun.....achha likhte hai aap...

pallavi trivedi said...

sachmuch apni country ke pilot bhi to gahri neend so rahe hain..auto mod mein chal raha hai desh

vijaymaudgill said...

आपने सच में बहुत अच्छा लिखा करंट इश्यू को बहुत सलीके से पिरोया है और एक बहुत बड़ा प्रश्न उठाया है आपने। हमारे देश की हालत तो बेहतर है, मगर पायलेट हम लोग हैं और हमारे ऊपर नेता बैठे हैं मिश्रा बनकर, जो सिर्फ़ हुक़्म देते हैं। अगर हम सच में अपने देश की तरक्की और ख़ुद अच्छा जीवन व्यतीत करना चाहते हैं, तो हमें पहले ख़ुद को बदलना होगा। हर आदमी ये ही सोचता है कि मेरे बदलने से क्या होगा? लेकिन कुछ भी तभी होगा जब हम बदलेंगे। बहुत अच्छा लगा आपका लेख। शुभकामनाएं

महेंद्र मिश्रा said...

sach hai aaj desh ka koi dhani dhori nahi hai koi dekhane sunane vala nahi hai.....

poemsnpuja said...

ab aise pilot kahan paida hote hain ki desh ko chala sakein, kisi disha me badha sakein ya surakshit landing hi kara sakien. kya karega hamara desh autopilot pe nahin chalega to?

अनूप शुक्ल said...

स्थिति बरकरार है पोस्ट लिखे जाने के दो साल बाद भी। इस लिहाज से कालजयी और सालजयी पोस्ट है।

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