सफेद घर में आपका स्वागत है।

Saturday, May 31, 2008

वर्नाकुलर मीन्स लैंग्वेज ऑफ़ रोमन स्लेव्स

राजेंद्र यादव की कहानी - टूटना - पढ़ रहा था तो एक शब्द पर ध्यान गया की- वर्नाकुलर मीन्स लेंग्वेज ऑफ़ रोमन स्लेव्स , जिसे कहानी का नायक किशोर नफरत से बोल रहा था। उसके विचार से अंग्रेजी वाले अपने बड़प्पन को जताने के लिए ऐसे शब्दों का जानबूझकर इस्तेमाल करते हैं। पढ़ते वक्त लगा की ये शब्द तो आज भी इस्तेमाल हो रहे हैं लेकिन इनका मतलब सिर्फ़ मादरेजबान या मदर टंग कह कर बताया जाता है। कभी किसी ने इसके इतिहास मे जानने की कोशिश नही की। खैर वैसे भी भाषा का मतलब ही अपनी बात को समझाने के लिए होता है लेकिन देख रहा हूँ की हमारे फ़िल्म स्टार वर्नाकुलर बोलने मे जैसे ख़ुद को इंडियन स्लेव मानने लगते हैं , और उनका ये मानना केवल अवार्ड फंक्शन तक ही सीमित होता है, फिल्म करने मे कोई आपत्ति नही होती। यानी खाते हिन्दी की हैं गाते अंग्रेजी की हैं। यानी उन्हें अंग्रेजी स्लेव बनने मे आपत्ति नहीं है, उन्हें आपत्ति है तो केवल इंडियन स्लेव बनने मे क्योंकि कहा है न की - घर का जोगी जोगडा आन गाँव का सयाना । आप की क्या राय है दोस्तो, जरा यहाँ भी बताइयेगा।

3 comments:

Gyandutt Pandey said...

मैं सिनेमा वालों की नहीं कह सकता। पर मेरी अपनी पढ़ाई अन्ग्रेजी में और तकनीकी/विश्लेषणात्मक सोच भी अन्ग्रेजी में। हिन्दी में चेतन-यत्न करने पर लिख पाते हैं। और उसमें कई लोग श्रेय देने की बजाय अन्ग्रेजी ठेलक मानते हैं।
हिन्दी ब्लॉगजगत में तो हम निर्गुट ***टोली के जीव हैं।:)

Satish Yadav said...

निर्गुट रहें वही अच्छा होता है, वरना वन साईडेड स्टैम्प ऐक बार लग जाय तो हटना मुश्किल होता है ः)

अनूप शुक्ल said...

अब आप समझ रहे हैं कि ज्ञानजी हिन्दी लिखकर कित्ती बड़ी हिन्दी सेवा कर रहे हैं लेकिन उनको कोई न क्रेडिट देता है न श्रेय! हिन्दी सेवा के काम पर बड़े-बड़े लोगों का कब्जा है।

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'
A Photo from - Thoughts of a Lens

ढूँढ ढाँढ (Search)

© इस ब्लॉग की सभी पोस्टें, कुछ छायाचित्र सतीश पंचम की सम्पत्ति है और बिना पूर्व स्वीकृति के उसका पुन: प्रयोग या कॉपी करना वर्जित है। फिर भी; उपयुक्त ब्लॉग/ब्लॉग पोस्ट को हापइर लिंक/लिंक देते हुये छोटे संदर्भ किये जा सकते हैं।




© All posts, some of the pictures, appearing on this blog is property of Satish Pancham and must not be reproduced or copied without his prior approval. Small references may however be made giving appropriate hyperlinks/links to the blog/blog post.