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Saturday, June 27, 2015

ललित मोदी आफ्टर चार हजार साल बाद !

 
 
उत्खनन के दौरान मिट्टी में दबे ललित मोदी नाम के शिलापट्ट को देखते ही उत्खनन कार्य में जुटे मजदूरों ने जल्दी जल्दी ब्रश द्वारा मिट्टी हटाना चाहा लेकिन ऊपर की ओर खड़े सुपरवाईजर की सख्त हिदायत थी कि उत्खनन के दौरान जल्दबाजी न करें। चीजें साबुत निकलें तो विश्लेषण में आसानी होती है।

  वहीं मजदूरों का कहना था कि वे आज तक केवल  भुने हुए चावल, भुने हुए चने, भुनी हुई दाल आदि के अवशेष ही उत्खननों के दौरान प्राप्त कर सके हैं, वह भी किसी मृदभांड में या किसी परित्यक्त चूल्हे में राख और मिट्टी के बीच दबे हुए मिले हैं, लेकिन यह पहली चीज है जिस पर चार हजार साल पहले बड़े बड़े लोगों के साथ संबंध रखने और उस संबंध को भुनाने वाले का नाम लिखा है। ऐसे में उत्खनन के मान्य सिद्धांतों के अनूरूप चलनी से चाल कर, ब्रश से मिट्टी हटाकर धीरे धीरे उत्खनन करना बहुत अखर रहा है। उत्कंठा बढ़ती ही जा रही है।

 वहीं बगल वाले गढ्ढे में खड़े वरिष्ठ पुरातत्वविद का कहना है कि उत्खनन में लगे मजदूर ऐसे शिलापट देख कर ज्यादा उत्कंठित न हों क्योंकि ऐसे संबंध भुनाऊ लोगों के शिलापट्ट पहले भी बहुतायत में मिलते रहे हैं। यह शिलापट्ट इस मामले में थोड़ा सा अलग इसलिये है क्योंकि जिसका नाम लिखा है वह खुद बोल बोल कर अपने संबंधों को उजागर कर रहा था। केवल इतने से कारण की वजह से उत्खनन में जल्दीबाजी करना अनुचित है।

   वहीं इस शिलापट्ट के बारे में सुनते ही हांफते डाफते उत्खनन स्थल पर पहुंचे इतिहासकारों का मानना है कि इस गड़े हुए शिलापट्ट को निकालने के लिये ब्रश और चलनी का इस्तेमाल करना ठीक नहीं होगा। बहुत ज्यादा समय लग सकता है क्योंकि यह शिलापट्ट इस पर उल्लिखित व्यक्ति की तरह ही जितना जमीन से ऊपर नजर आ रहा है उससे कहीं ज्यादा जमीन के नीचे दबा होगा। इसलिये हो सके तो पहली बार पुरातात्विक उत्खनन के स्टैंडर्ड प्रोसिजर को दरकिनार करते हुए जेसीबी मशीन द्वारा उत्खनन कराया जाय।

    वहीं इस विषय पर पीएचडी करने वाले शोधार्थियों का मानना है कि जेसीबी मशीनों के मुंहाने पर बड़े बड़े विशालकाय ब्रश बांधकर उत्खनन किया जाय तो पुरातत्विक स्टैंडर्ड प्रोसिजर फॉलो किया जा सकता है। इससे उत्खनन में तेजी भी आएगी और इस उल्लिखित व्यक्ति ललित मोदी को यह कहने की नौबत भी नहीं आएगी कि वह किसी जेसीबी से मिल चुका है अन्यथा जैसी कि किवदंती है, यह वो शख्स था जो चार हजार वर्ष पूर्व हर किसी से मिल चुका था और लोग मानवता के नाते इससे मिल भी लेते थे। यह अलग बात है कि बाद में वही लोग खुद को ठगा हुआ और ललित मोदी को पीड़ित बताते थे। ऐसे विलक्षण महापुरूष के नाम वाला शिलापट् मिलना एक दुर्लभ पुरातात्विक संयोग है।

(ईसवी सन् 6020 की इतिहास की उत्तर पुस्तिका के अंश)

- सतीश पंचम

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

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