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Sunday 5 October 2014

OP stop smelling your socks - फिल्म शॉर्ट है लेकिन शानदार है !


      बाजारवाद के दौर में कुछ अच्छी फिल्में दब कर रह जाती हैं, वे लोगों के बीच आ ही नहीं पातीं जबकि एक अच्छी फिल्म के सारे गुण, सारी तकनीक उनमें शामिल रहती है। ऐसी ही फिल्म है श्रीराम डाल्टन की बनाई शॉर्ट फिल्म ''OP stop smelling your socks' . मुख्य भूमिका में हैं नवाजुद्दीन सिद्दिकी। जब यह फिल्म बनी थी तब वे उतने फेमस नहीं हुए थे। साल था 2010.

  कहानी कुछ यूं है कि नवाजुद्दीन सिद्दिकी एक प्रॉडक्शन ब्वॉय हैं। एक शूटिंग के सिलसिले में अपनी प्रॉडक्शन यूनिट के साथ यह प्रॉडक्शन ब्वॉय OP कहीं एक ही गाड़ी में जा रहा है। उसकी इच्छा है कि अबकी बार वह विंडो सीट पर बैठे। हमेशा उसे बीच में बैठा दिया जाता है। आगे की सीट पर डायरेक्टर और ड्राईवर बैठते हैं। पीछे की सीट जहां तीन लोग बैठ सकते हैं वहां कुल चार लोग ठूंसे हुए किसी तरह बैठते हैं। ओपी को बीच में बैठना अच्छा नहीं लगता। विंडो सीट पाने के चक्कर में वह गाड़ी से उतर कर नीचे झूठ-मूठ का पेशाब भी करता है ताकि बैठते समय खिड़की वाली सीट मिले लेकिन उसे तब भी वह सीट नहीं मिलती। कैमरामैन बाहर निकल कर खड़ा रहता है, उसके आने पर अंदर की ओर वापस बैठा कैमरामैन फिर अपनी विंडो सीट पकड़ लेता है। उधर दूसरी ओर फिल्म की हिरोइन और एक शख्स है। हिरोइन कैमरामैन से रास्ते भर बतियाने में ही मगन है। बीच में फंसता है बेचारा प्रो़डक्शन ब्वॉय ओपी।

  इसी बीच लंबी यात्रा के दौरान सभी को नींद आ जाती है और बोर हो रहे ओपी को याद आता है कि उसके मोजों में से बदबू आ रही है। वह चुप्पे से अपने मोजे निकालता है, और वही रखे बोतल के पानी से हाथ बाहर निकाल मोजों को धोकर चुपचाप पानी की बोतल रख देता है। हिरोइन ने अपने बालों की क्लिप वहीं फ्रंट सीट के पीछे अटका कर रखी होती है। ओपी उस हेयर क्लिप को लेकर कैमरामैन वाली साइड की विंडो सीट पर अपने मोजे सूखने के लिये बाहर की ओर क्लिप से अटका देता है। हेयर क्लिप से अटके दोनों मोजे बाहर की ओर हवा में लहराते रहते हैं। इसी बीच ओपी को भी नींद आ जाती है। सपने में वह देखता है कि अब वह कैमरामैन पर हावी हो चुका है। कैमरामैन को वह दबोचे हुए है और बेचारा कैमरामैन घिघिया रहा है। अब विंडो सीट पर शान से ओपी बैठा है और हंस हंस कर हिरोइन से बातें कर रहा है। कुछ देर बाद ओपी की आंख खुलती है तो देखता है कि सिर्फ एक ही मोजा बाहर लहरा रहा है। एक मोजा गायब। इधर उधर देखता है तो सभी अपनी जगह सो रहे हैं। ड्राईवर वैसे ही गाड़ी चला रहा है। कैमरामैन वैसे ही विंडो सीट पर बैठा है, खुद वह वैसे ही बीच में ठुंसा हुआ है। तिसपर एक मोजा हवा में कहीं उड़ भी गया है। ओपी धीरे से वह मोजा क्लिप में से निकालता है और उसे भी बाहर फेंक देता है। तभी उसे अपने पास कुछ दबा हुआ सा लगता है और निकालने पर पता चलता है कि यह तो पहले वाला ही मोजा है जिसे वह उड़ गया समझ रहा था। परेशान हाल में वह कल्पना करता है कि अभी सबको बतायेगा तो लोग तरह-तरह से उसका मजाक बनायेंगे। वह फिर झपकी लेना शुरू करता है और आंख खुलती है तो बाहर फिर दोनों मोजे लहराते नजर आते हैं। ऐसा एक दो बार और होता है। कभी उसे लगता है कि एक मोजा गिर गया है तो कभी लगता है कि नहीं दोनों सही-सलामत हैं। इसी बीच झपट कर ओपी उन मोजों को पकड़ लेता है। उसकी इस कामयाबी पर गाड़ी के अंदर बैठे लोग ताली बजाते हैं। 

 लेकिन नहीं, बाहर एक ही मोजा लटक रहा है। ओपी के मन में कशमकश जारी है। 

     पूरी फिल्म देखते हुए लगातार एक तरह का सस्पेंस बना रहता है कि अब क्या होगा। अब ?  अब ? वहीं इस फिल्म में इस्तेमाल किया गया सत्तर अस्सी के दशक का सस्पेंस थ्रिलर वाला बैकग्राउण्ड म्यूजिक भी जोरदार है। श्रीराम डॉल्टन की इस शॉर्ट फिल्म को इसलिये भी देखना जरूरी है ताकि पता चल सके कि नवाजुद्दीन सिद्दिकी जैसे कलाकार एक दिन में तैयार नहीं होते। वे इन्हीं तरह की हार्ड कोर फिल्मों से रच-बसकर, तप कर निकलते हैं तो जाकर आगे कहीं झिलमिलाते हैं, सबकी नजरों में छा से जाते हैं। देखा जाय तो इस तरह की फिल्में किसी कलाकार के अंदर की कला को उभारने में, उसे मांजने-निखारने का एक ज़रिया भी हैं। फिर बतौर डायरेक्टर श्रीराम डाल्टन ने जिस तरह से सारी चीजों को एक पैकेज में उतारा है वह काबिले-तारीफ है। फिल्म 2008 में सिर्फ चार घंटे में बनी थी और लागत थी मात्र 2000 /-.  शॉर्ट फिल्मों के शौकीन, फिल्म विधा की जानकारी चाहने वाले जिज्ञासु प्रृवत्ति के लोग, छात्र इसे जरूर देखें। यह रही फिल्म - 'OP stop smelling your socks' .


- सतीश पंचम  



फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

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